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मुज़फ्फरनगर। पुरकाजी सामाजिक संस्था द्वारा रिहाना अदीब के नेतृत्व में शादाब जहान के संचालक द्वारा ब्लॉक पुरकाजी के लगभग 10 गांव के सेवा प्रदाताओं के साथ लिंग आधारित हिंसा पर सर्विस प्रोवाइडर बैठक का आयोजन किया गया जिसमें क्षेत्र के गांवों से आंगनवाड़ी स्कूल टीचर आशा सहायिका एएनएम पुलिस एवं जिला मुजफ्फरनगर से सखी वन स्टॉप सेंटर से जिला मैनेजर पूजा नरूला जी एवं अमित जी शामिल हुए। शादाब जहां ने बताया कि किस प्रकार महिलाओं एवं लड़कियों के साथ लिंग आधारित हिंसा बढ़ती जा रही है घटता लिंगानुपात से लेकर कम उम्र एवं जबरन विवाह घरेलू हिंसा ईव टीजनिंग बच्चियो के साथ यौन हिंसा और दहेज लेन देन के मामले एवं हत्या से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं अभी हाल ही में एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि यूपी में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध (Crime Against Women and Children) में कमी आई है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau) के आंकड़ों में ये बात सामने आई है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के मुकाबले 2021 में महिलाओं और बच्चों दोनों के खिलाफ अपराध में क्रमशः 6.2 फीसदी और 11.11 फीसदी की कमी आई है. लेकिन मुजफ्फरनगर की स्थिति में अभी और सुधार की आवश्यकता है हिंसा से पीड़ित महिलाओं लड़कियों एवं युवाओं को जागरूक करने के साथ-साथ उनको सरकारी विगं से कनेक्ट कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने जरूरत है। जिला मुजफ्फरनगर में का सेक्स रेश्यो बताता है कि 1000/886 बताता है कि है कि लिंग आधारित हिंसा जारी है। पूजा नरूला जी सखी वन स्टॉप सेंटर जिला मैनेजर जीने सखी वन स्टॉप सेंटर पर मिलने वाली सेवाओं के बारे में जानकारी दी एवं वह अपनी समस्या से किस तरह से निजात पा सकेंगी उसके बारे में बताया।थाना प्रभारी पुरकाजी धर्मेंद्र कुमार सिद्धू ने बताया कि हम लोग महिलाओं और लड़कियों का पहले भी सहयोग करते हैं और आगे भी करेंगे और काउंसलिंग के केसेज सखी वन स्टॉप सेंटर एवं अस्तित्व को को भेजेंगे ताकि महिलाओं का घर टूटने की वजह से परामर्श के बाद बस रहे और हम ज्यादा से ज्यादा सहयोग करेंगे और हम उम्मीद करते हैं कि हमें आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।आंगनबाड़ी कार्यकत्री कुलवेरी जी ने बताया कि बहु को भी बेटियों की तरह प्यार करना चाहिए मौके देने चाहिए और उनके साथ दोस्त बनकर और मां बनकर रहेंगे तो परिवार में अलग ही तरह की खुशहाली दिखेगी और संपन्नता दिखेगी।सुषमा आशा कुतुबपुर बताती हैं कि जब लड़कियां परेशान होती है तो वह अपने घर की तरफ देखते हैं लेकिन मां-बाप भी अपनी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति की वजह से या सामाजिक दबाव की वजह से बेटियों की मदद नहीं कर पाते बल्कि ऐसे में बेटी को मां-बाप की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और अपनी बेटी का सहयोग करना बहुत जरूरी है।फिरदौस अस्तित्व बताती है कि महिलाओं और लड़कियों के ऊपर रहते हैं हिंसा खत्म हो गई है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है गांव में जाकर महिलाओं और लड़कियों की स्थिति देखो लड़कियां या तो स्कूल नहीं जा रहे हैं और नहीं तो पांचवी आठवीं दसवीं के बाद ड्रॉप आउट है और महिलाएं दिनभर घर का काम करते हैं मजदूरी करते हैं और शाम को घर में पिटी जाती हैं कोई भी आस-पड़ोस वाला मदद करने के लिए नहीं पहुंचता। कविता जब लड़कियों या महिलाओं के साथ हिंसा होती है तो कोई भी गलत को गलत कहने वाला नहीं होता बल्कि तमाशा देखने के लिए बहुत लोग खड़े हो जाते हैं और महिलाओं और लड़कों के ऊपर ही उंगली उठ जाती है सवाल उठाए जाते हैं।














