बाँदा। दस दिन तक जिस बप्पा ने बांदा को अपने रंग में रंगा, उसी बप्पा को विदा करते हुए पूरा शहर रो पड़ा। आंखों में आंसू थे, चेहरे पर मुस्कान थी और जुबां पर एक ही प्रार्थना थी गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना गणेश महोत्सव के आखिरी दिन बांदा का नजारा देखते ही बन रहा था। शहर के कोने-कोने से छोटे-बड़े विमानों पर सवार होकर बप्पा निकले। महाराणा प्रताप चौक से लेकर अशोक लाट तक… जहां तक नजर जा रही थी, सिर्फ भक्तों का सैलाब था। कोई डीजे की धुन पर नाच रहा था, कोई ढोल पर झूम रहा था तो कोई हाथ में गुलाल लिए बप्पा को निहार रहा था। बच्चे, बूढ़े, जवान सब एक ही रंग में रंगे थे – गणपति के रंग में। महिलाओं ने जगह-जगह आरती उतारी और फूल बरसाए।शाम ढलते ही यह विराट शोभायात्रा केन नदी के घाट पर पहुंची। वहां माहौल और भी भावुक हो गया। भक्तों ने विधि-विधान से अंतिम पूजा की, बप्पा को तिलक लगाया और फिर भारी मन से केन की लहरों में विसर्जित कर दिया।
जैसे ही बप्पा जल में विलीन हुए, कई भक्तों की आंखें भर आईं महापर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी। खुद एसपी पलाश बंसल पूरे विसर्जन रूट पर पैनी नजर बनाए रहे। ड्रोन से निगरानी, हर चौराहे पर पुलिस, केन घाट पर एसडीआरएफ, गोताखोर और भारी पुलिस बल तैनात रहा। सीओ सिटी और कोतवाली प्रभारी खुद घाट पर मौजूद रहकर एक-एक मूर्ति का सुरक्षित विसर्जन कराते रहे।विसर्जन से पहले श्री गणेशाय महोत्सव समिति ने शहर की सभी गणपति समितियों को मंच पर बुलाकर शील्ड देकर सम्मानित किया और उनके सहयोग के लिए आभार जताया।















