बवासीर कब बन जाता है नासूर? डॉक्टर ने बताया – कब दवाओं से मिल सकता है आराम

बवासीर यानी पाइल्स एक सामान्य लेकिन बेहद परेशान करने वाली समस्या है। यह तब होता है जब मलाशय या गुदा (एनस) की नसों में सूजन आ जाती है। आमतौर पर शुरुआती अवस्था में यह समस्या हल्की रहती है और दर्द, खुजली, जलन या थोड़े बहुत खून आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन जब इसे लंबे समय तक अनदेखा किया जाए या सही इलाज न मिले, तो यही बवासीर गंभीर रूप ले लेता है और नासूर की स्थिति तक पहुंच सकता है। नासूर तब बनता है जब गुदा क्षेत्र में सूजन के साथ-साथ संक्रमण भी हो जाता है और एक असामान्य सुरंग (फिस्टुला) बन जाती है, जिसमें लगातार मवाद निकलता रहता है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि बवासीर में तेज दर्द, दुर्गंधयुक्त स्राव, लगातार खून बहना या सूजन के साथ बुखार आने लगे, तो यह संकेत है कि समस्या बढ़ चुकी है और तुरंत चिकित्सकीय जांच की जरूरत है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि बवासीर की शुरुआती दो स्टेज में दवाओं, मलहम, फाइबर युक्त आहार और जीवनशैली में सुधार से राहत मिल सकती है। नियमित पानी पीना, कब्ज से बचना, लंबे समय तक शौच में जोर न लगाना और हल्की एक्सरसाइज काफी मददगार होती है। वहीं, जब बवासीर तीसरी या चौथी स्टेज में पहुंच जाता है, तो केवल दवाओं से आराम मिलना मुश्किल हो जाता है और डॉक्टर रबर बैंड लिगेशन, लेजर उपचार या शल्य चिकित्सा जैसी प्रक्रियाओं की सलाह दे सकते हैं। अगर बवासीर नासूर में बदल चुका हो, तो ऑपरेशन ही एकमात्र प्रभावी तरीका माना जाता है। इसलिए, शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार शुरू करना जरूरी है, क्योंकि समय रहते इलाज लेने से व्यक्ति बड़े दर्द, जटिलताओं और सर्जरी से बच सकता है।

कब सर्जरी और कब दवाओं से मिल जाता है आराम

डॉ गुप्ता बताते हैं कि बवासीर के मामलों में शुरुआती दो स्टेज में केवल अच्छे खानपान और दवाओं के माध्यम से बीमारी को ठीक किया जा सकता है. शुरुआती दो स्टेज में आमतौर पर सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती. इन स्टेज में मरीज को हाई फाइबर डायट,पानी की मात्रा बढ़ाना, कब्ज से बचाव और दवाएं दी जाती है. अगर मरीज समय पर इलाज शुरू कर दे, तो दवाओं और डायट से कुछ महीनो में ही काफी राहत मिल जाती है.

डॉ गुप्ता कहते हैं कि अगर कोई मरीज तीसरी या चौथी स्टेज में आता है तो फिर सर्जरी करनी पड़ सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें गांठ बड़ी हो जाती है और मरीज को खून आता रहता है और दर्द भी गंभीर हो जाता है. ऐसे में सर्जरी करनी पड़ती है. इसके लिए स्टेपलर हेमोरॉयडेक्टॉमी, लेजर सर्जरी की जाती है.

अधिकतर मरीज देरी से इलाज के लिए आते हैं

बवासीर के अधिकतर मरीज देरी से इलाज के लिए आते हैं. इतनी देर कर देते हैं कि उनकी बीमारी तीसरी या फिर चौथी स्टेज में होती है. ऐसे में सर्जरी ही ऑपशन होता है, लेकिन जरूरी ये है कि लोग बवासीर के लक्षणों को पहचानें. अगर किसी को लंबे समय से कब्ज है. सुबह फ्रेश होने में जोर लगाना पड़ता है और पेट में दर्द रहता है तो इस मामले में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. इन लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

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