UPI चार्ज पर मोदी सरकार के साथ सीएम उमर अब्दुल्ला,

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क के मामले में केंद्र सरकार का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि डिजिटल-पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है, लेकिन साथ ही सरकार को आम ग्राहकों का ध्यान रखने की सलाह भी दी.सीएम ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “ये शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है. सबसे पहली बात, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगता है. इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा ट्रांजैक्शन न करें.

‘UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं’

मुख्यमंत्री ने कहा कि UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है. उन्होंने बताया कि पेमेंट सिस्टम को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है. उन्होंने कहा, “हकीकत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह से मुफ्त में मिलती है, तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते. फिर भी, भारत सरकार को ये पक्का करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इन शुल्कों का बोझ न पड़े. अगर कंपनियों से शुल्क लिया जाता है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वैसे भी कंपनियां UPI के जरिए काफी मुनाफा कमाती हैं.आने वाले विधानसभा सत्र के बारे में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ये सुनिश्चित करना होगी कि सदन का कामकाज सुचारू रूप से चले और विधायकों को संतोषजनक जवाब मिलें. उन्होंने कहा, “विधानसभा सत्र में दो तरह के एजेंडे होते हैं. एक तो सरकार का अपना विधायी कामकाज होता है. केंद्र शासित प्रदेश में पूर्ण राज्य की तुलना में यह स्वाभाविक रूप से कम होता है, लेकिन फिर भी ऐसे विधायी मामले होते हैं जिन्हें सरकार सदन के सामने पेश करती है. इसके साथ ही, माननीय विधायकों को चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों और लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सवाल उठाने का मौका मिलता है. बिल और प्रस्ताव पेश किए जाते हैं.

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