उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर एक नया और सख्त नियम लागू किया है। बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने वाले छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन अब केवल अंग्रेजी माध्यम के परीक्षक ही करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है, ताकि छात्रों के साथ किसी भी प्रकार की गलत या अनुचित जांच की संभावना को कम किया जा सके।
बोर्ड के अनुसार कई बार यह देखने में आया है कि अंग्रेजी माध्यम की कॉपियां ऐसे परीक्षकों द्वारा जांची जा रही थीं जो हिंदी माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षक हैं। इससे उत्तरों की सही समझ और मूल्यांकन में त्रुटियां होने की संभावना बढ़ जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने यह नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अंग्रेजी माध्यम की उत्तरपुस्तिकाएं केवल उन्हीं शिक्षकों को दी जाएंगी जो अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने का अनुभव रखते हैं।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मूल्यांकन के बाद किसी उत्तरपुस्तिका में गंभीर त्रुटि या लापरवाही पाई जाती है तो इसके लिए संबंधित परीक्षक के साथ-साथ उप प्रधान परीक्षक (डीएचई) को भी जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे मामलों में उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। बोर्ड का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में लापरवाही या गलत अंक देने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।
इस नियम के लागू होने से मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। बोर्ड अधिकारियों का मानना है कि इससे छात्रों को उनकी मेहनत के अनुसार सही अंक मिल सकेंगे और परिणाम अधिक निष्पक्ष होंगे। इसके अलावा मूल्यांकन केंद्रों पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी, ताकि निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन हो सके।
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं हर साल लाखों छात्र देते हैं, इसलिए कॉपियों की जांच प्रक्रिया को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। नए नियम के बाद उम्मीद की जा रही है कि कॉपी जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी। बोर्ड ने सभी मूल्यांकन केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।















