जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को स्टेटहुड को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिसपर हंगामा खड़ा हो गया, जिसके कारण 30 मिनट तक विधानसभा स्थगित रही. बाद में पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी विधायक ही जम्मू कश्मीर को स्टेटहुड दिए जाने के बीच एक रोड़ा बन रहे हैं. उमर अब्दुल्ला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि अगर बीजेपी वास्तव में जम्मू कश्मीर के लोगों के खैरख्वाह होते तो वह इस पुराने प्रस्तावों को बहाना नहीं बनाते, जो प्रस्ताव पहले ही विधानसभा में पास हुए हैं.मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुख्य बात यह है कि बीजेपी राज्य का दर्जा (statehood) बहाल करने के लिए कुछ भी नहीं करना चाहती, यह प्रस्ताव पहले पास हुए प्रस्तावों में कोई बदलाव नहीं करता, हम चाहते हैं कि बीजेपी इस बार सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए वोट करे.
उमर अब्दुल्ला न कहा कि पिछले 2 सालों में हमें किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जिस प्रस्ताव पर बीजेपी को आपत्ति है, वह पहले ही पास हो चुके हैं, हमने उन प्रस्तावों का ज़िक्र सिर्फ इसलिए किया है ताकि इसे एक अतिरिक्त कदम के तौर पर देखा जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पुराने प्रस्तावों, जिनका जिक्र इस प्रस्ताव में किया गया है, उसका मतलब यह नहीं है कि उन प्रस्तावों को फिर छेड़ा जा रहा है.
राज्य का दर्जा पाने में रुकावट बनी बीजेपी
सीएम ने कहा, ‘हम उन प्रस्तावों को नहीं छेड़ रहे हैं और न ही यह प्रस्ताव उन्हें कमजोर करेगा. कृपया मुझे इस प्रस्ताव का वह एक शब्द बताएं जो असंवैधानिक या संसदीय मर्यादा के खिलाफ हो’. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के पूरी तरह से खिलाफ है और लगता है कि राज्य का दर्जा पाने में ये बीजेपी के 29 विधायक ही सबसे बड़ी रुकावट हैं.उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह प्रस्ताव सिर्फ भारत सरकार को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए मनाने के मकसद से है, बीजेपी ने खुद राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था. उन्होंने कहा कि वह मुझे तो मेरे घोषणापत्र की याद दिलाते हैं, लेकिन अपना घोषणापत्र भूल जाते हैं, इस पूरे प्रस्ताव का मकसद लोगों की आवाज नई दिल्ली तक पहुंचाना है.
BJP ने प्रस्ताव को बताया विवादित
बीजेपी विधायक और एलओपी सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश इस प्रस्ताव को सही नहीं ठहराया और कहा कि वह जिस 26 जून 2000 प्रस्ताव का जिक्र इसमें कर रहे हैं, वह उसी समय केंद्र सरकार द्वारा ठुकराया गया था. उन्होंने कहा, ‘आज पेश किया गया प्रस्ताव विवादित और बहस वाला था. जिस तथाकथित स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) प्रस्ताव को बीजेपी ने अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान खारिज कर दिया था और फाड़ दिया था, जबकि उस समय उमर अब्दुल्ला उनकी सरकार का हिस्सा थे, उसी प्रस्ताव को आज फिर से उठाना या विशेष दर्जे पर उनके तथाकथित 2024 के प्रस्ताव का ज़िक्र करना, इसे पूरी तरह से विवादित, अस्वीकार्य और अमान्य प्रस्ताव बनाता है, जिसे BJP कभी बर्दाश्त नहीं करेगी’.
‘कांग्रेस अपना स्टैंड क्लियर करे’
सुनील शर्मा ने कहा, ‘मैं कांग्रेस पार्टी से एक सवाल पूछना चाहता हूं, कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. राहुल गांधी से लेकर उनकी राज्य इकाई के प्रमुख तक, सभी को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए. क्या वो इस प्रस्ताव, 1953 से पहले की स्थिति और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं या वो सरकार के साथ खड़े हैं? उन्हें साफ-साफ बताना चाहिए. अगर वो सरकार का समर्थन करते हैं, तो क्या वो अनुच्छेद 370 और तथाकथित स्वायत्तता प्रस्ताव पर सरकार के रुख का समर्थन करते हैं?















