पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ी बगावत अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री और कूचबिहार में तृणमूल का बड़ा चेहरा रहे रवींद्रनाथ घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने बड़ा पासा फेंका है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल होने के बाद घोष ने कहा है कि अगर ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूर कर दें तो नाराज नेता और कार्यकर्ता पार्टी में लौटने को तैयार हैं।
‘अभिषेक की मनमानी और अनुभवहीनता ने पहुंचाया नुकसान’
संवाददाताओं से बातचीत करते हुए रवींद्रनाथ घोष ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के पास राजनीतिक अनुभव की कमी है और वे किसी जन-आंदोलन से निकलकर नहीं आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक की मनमानी के चलते 80 से अधिक मौजूदा विधायकों और मंत्रियों के टिकट काट दिए गए, जबकि कई वरिष्ठ नेताओं को सांगठनिक पदों से हटा दिया गया।घोष ने राजनीतिक रणनीतिकार कंपनी आई-पैक (I-PAC) पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, “2011 या 2016 में आई-पैक नहीं थी। अचानक कुछ युवाओं के समूह को हमारे ऊपर थोप दिया गया, जो हमें बताते थे कि क्या करना है। संघर्ष से बनी पार्टी को इन लोगों ने बर्बाद कर दिया और चले गए।”
‘क्या दीदी के हाथों में अब ताकत बची है?’
दो दशक से ज्यादा समय तक तृणमूल के जिलाध्यक्ष रहे घोष ने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि दीदी के हाथों में अब कोई वास्तविक शक्ति नहीं बची है और फैसले नाकाबिल लोगों द्वारा लिए जा रहे हैं।फिलहाल, बागी गुट ने राज्य और जिलों में अपनी समानांतर समितियां गठित कर ली हैं। घोष ने कहा कि उत्तर बंगाल के अधिकांश विधायक और नेता एक साथ आ चुके हैं और वे पार्टी कार्यकर्ताओं के हित में बहुमत वाले बागी गुट के साथ खड़े हुए हैं।
ममता बनर्जी का रुख: डैमेज कंट्रोल या सख्त रुख?
हाल ही में ममता बनर्जी ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि पार्टी को कमजोर करने या केंद्रीय एजेंसियों के डर से बगावत करने वालों के सामने वे नहीं झुकेंगी। हालांकि, पार्टी के अस्तित्व और विधानसभा में बहुमत को बनाए रखने के लिए अब वे कोर कमेटी के जरिए बातचीत के रास्ते खुले रख रही हैं।तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के प्रतिनिधि का कहना था कि “हम पार्टी को बचाने के लिए किसी भी समय बात करने को तैयार हैं, लेकिन सम्मान और सिद्धांत से कोई समझौता नहीं होगा। अगर हमारी जायज मांगों को सुना जाता है तो अलग रास्ता चुनने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
अभिषेक बनर्जी का गुट और भावी रणनीति
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का मानना है कि पार्टी में पेशेवर रुख और नए चेहरों की भागीदारी अनिवार्य है। बागी नेताओं की शर्तों को पूरी तरह मानना उनके द्वारा किए गए संगठनात्मक सुधारों को पीछे ले जाने जैसा हो सकता है। इसलिए समझौता केवल बीच का रास्ता निकालकर ही संभव है।















