बाँदा।उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार स्वास्थ्य चिकित्सा को लेकर अति गंभीर है। तो वहीं जिम्मेदार सरकार की छवि को खराब करने में लगे हुए हैं।बीते कुछ माह पहले डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने जनपद में दौरा किया था। और अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इसके बावजूद भी लगातार बांदा जिला अस्पताल में योगी सरकार की छवि व डिप्टी सीएम के आदेशों की अवहेलना आए दिन देखने को मिलती है। मुख्यमंत्री व डिप्टी सीएम के सख्त आदेश हैं कि किसी भी डॉक्टर के द्वारा किसी भी मरीज को बाहरी दवा व जांच ना लिखी जाए।आदेश के बावजूद भी जिला अस्पताल में तैनात ओपीडी के डॉक्टरो के द्वारा दूरदराज से आए हुए गरीब मजबूर बेसहारा मरीजों को हजारों रुपए की डॉक्टर के द्वारा बाहरी दवा लिखी जाती है। जब मरीज डॉक्टर को दिखाने जाता है। तो डॉक्टर पहले बाहर से दवा लाने को कहते हैं और फिर अपने चेंबर पर दवा देख कर मरीज को घर जाने के लिए कहते हैं। हालांकि ऐसे लोगों पर जब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होगी तब तक सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं पर ऐसे डॉक्टरों के द्वारा प्रहार निरंतर जारी रहेगा आखिर योगी सरकार की सख्ती के बावजूद भी डॉक्टर के द्वारा किए जा रहे लगातार कार्यों पर सवालिया निशान खड़े होते हैं।आखिर मरीजों को हज़ारो रु की दवा व जांच लिखने की हिम्मत कहाँ से अति है ।आखिर ऐसे डॉ0पर कार्यवाही सुनिश्चित क्यो नहीं होती है।कब तक ऐसे सिस्टम के शिकार मासूम लोग होते रहेंगे। आखिर कब इन पर कार्यवाही होगी।जिला अस्पताल के भृष्टाचार में लिप्त डॉ की शिकायत की गई तो मौके पर सीएमएस पहुंचे और कुछ डॉ0के चेंबर में बाहरी लोगों को पाया पूछताछ में डॉ जवाब नहीं दे सके।आरोप है कि डॉ अपने चेम्बर में बाहरी लोगों को बैठालकर कमीशन के चलते मनमानी बाहरी दवा लिखवा कर तय मेडिकल स्टोर से दवा मनागवाते है।आखिर लगातार शिकायत के बावजूद भी ओपीडी में तैनात डॉक्टरों पर कड़ी कार्यवाही क्यो नहीं होती है।क्या हर जिम्मेदार पर कमीशन भारी पड़ता है।















