माउंट आबू का नाम बदलने और मांस-मदिरा पर प्रतिबंध की मांग

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर माउंट आबू का नाम बदलकर “आबूराज तीर्थ” करने और वहां खुले में मांस बिक्री व शराब सेवन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

पत्र में उन्होंने बताया कि आबू पर्वत प्राचीन काल से सनातन धर्म की आस्था का केंद्र रहा है। यहां कई ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी, जिनके द्वारा स्थापित ऐतिहासिक मंदिर आज भी स्थित हैं। इनमें गुरु शिखर, देलवाड़ा जैन मंदिर, अचलगढ़, अर्बुदा देवी मंदिर और विश्व प्रसिद्ध ब्रह्माकुमारी आश्रम शामिल हैं। इन धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।

नेताओं का कहना है कि खुले में मांस बिक्री और शराब सेवन से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। उन्होंने मांग की कि इस क्षेत्र को पुनः “आबूराज तीर्थ” के नाम से पहचाना जाए और यहां मांस-मदिरा के खुले उपयोग पर रोक लगाई जाए।

राज्यमंत्री ओटाराम देवासी ने बताया कि पूर्व की सरकार ने इस स्थान का नाम “माउंट आबू” कर दिया था, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह “आबूराज तीर्थ” के नाम से जाना जाता था, जहां 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है।

भाजपा जिला प्रवक्ता रोहित खत्री ने बताया कि लंबे समय से स्थानीय लोग इस बदलाव की मांग कर रहे थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इस पर सकारात्मक कदम उठाएगी और धार्मिक भावनाओं के अनुरूप निर्णय लेगी।

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