जल्दबाजी में रिएक्ट नहीं करता भारत: जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज विदेश नीति से जुड़ा एक बहुत बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत कभी कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं करता, बल्कि हम सोच-समझकर फैसले करते हैं, जिससे देश के रणनीतिक हितों को अच्छी तरह से साधा जाता है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे कुछ नेता भारत को लेकर आए दिन कुछ भी टीका-टिप्पणी करते रहते हैं, लेकिन भारत तत्काल पलटवार करने की जगह सोच-समझकर जवाब देता है।

जस्टिन ट्रूडो अच्छा उदाहरण

भारत अपने फैसले सोचमझकर इसलिए लेता है, क्योंकि हम अमेरिका के साथ भविष्य में अपने रिश्ते नहीं बिगाड़ना चाहते। उदाहरण के तौर पर जब कनाडा में जस्टिन ट्रूडो प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने भारत के साथ रिश्ते खराब करने काफी कोशिश की। इसके उलट मार्क कार्नी जबसे कनाडा के पीएम बने हैं, उन्होंने हमेशा भारत के साथ संबंध बेहतर करने पर ही जोर दिया है। ऐसा ही कुछ अमेरिका को लेकर भी है, उम्मीद है कि जब ट्रंप कुर्सी से हट जाएंगे तो भारत और अमेरिका के रिश्ते दोबारा पहले की तरह पटरी पर आने की उम्मीद है।

जटिल माहौल में काम कर रहे

विदेश नीति पर ये बड़ा बयान एस जयशंकर ने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) की 25वीं सालगिरह के मौके पर मंगलवार को दिया। एस. जयशंकर ने आगे कहा कि हम टैरिफ में ज्यादा उतार-चढ़ाव और दूसरे बाजारों में डंपिंग में बढ़ोतरी भी देख रहे हैं। इसका सबसे अच्छा मुकाबला कैसे किया जा सकता है? भारत के हित बड़े हैं, ज्यादा जुड़ाव है, ज्यादा पार्टनर हैं। हम एक जटिल माहौल में काम कर रहे हैं, हमें लगातार इस बदलते हालात के हिसाब से खुद को ढालना होगा। अक्सर, समाधान रणनीति और प्रतिक्रियाओं को बेहतर बनाने में ही मिलते हैं।

संतुलन बनाना क्यों जरूरी

अभी दो बड़े टकराव चल रहे हैं, एक खाड़ी क्षेत्र में और दूसरा यूक्रेन में। दोनों ही मामलों में भारत के सभी संबंधित पक्षों के साथ अच्छे संबंध हैं। इसलिए कोई एक तरीका या रुख अपनाना आसान नहीं है। अलग-अलग हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, यह चर्चा का एक जायज विषय है। ग्लोबल इकॉनमी में हर चीज़ का हथियार के तौर पर इस्तेमाल देखा जा रहा है।
डॉ. एस जयशंकर, विदेश मंत्री

विदेशों में भारतीय समुदाय सुरक्षित

एस जयशंकर ने आगे कहा कि अगर मौजूदा उथल-पुथल के दौर में हमारी रणनीति का आकलन किया जाए, तो नतीजे तक पहुंचने के लिए कुछ साफ पैमाने हैं। ऊर्जा सुरक्षा की बात करें तो अलग-अलग स्रोतों से सप्लाई बनाए रखने और लागत कम रखने में मदद मिली है। नए पार्टनर नए बाजार और नए रास्तों ने हमारे एक्सपोर्ट को सुरक्षित रखा है और उसे बढ़ाया भी है। इसी तरह, तेजी से अपनाए गए स्मार्ट समाधानों से हमारी सप्लाई चेन को भी फायदा हुआ है। सही नीतियों की वजह से विदेशों में भारतीय समुदाय काफी हद तक सुरक्षित रहा है। जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच-समझकर किए गए फैसलों से हमारे रणनीतिक हितों को भी बेहतर ढंग से साधा गया है। ये सभी बातें लगातार बहस और बातचीत के महत्व को दिखाती हैं।

बौद्धिक भागीदारी भी बढ़नी चाहिए

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि आज भारत कई देशों और क्षेत्रों के साथ बड़े पैमाने पर जुड़ रहा है। हमारे हित अब ग्लोबल हो गए हैं, हमारी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और भारत से उम्मीदें भी उसी हिसाब से बढ़ी हैं। भारत ग्लोबल चुनौतियों को लेकर अपने नजरिए को ज्यादा भरोसे के साथ रख रहा है। इनमें ‘ग्लोबल साउथ’ से जुड़ी चुनौतियां भी शामिल हैं। जैसे-जैसे ग्लोबल स्तर पर भारत की भूमिका बढ़ रही है, अंतरराष्ट्रीय मामलों में हमारी बौद्धिक भागीदारी भी उसी गति से बढ़नी चाहिए।

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