उत्तराखंड का एक और Hydro Project बना खतरे की घंटी,

गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली में ही एनटीपीसी की बहुचर्चित निर्माणाधीन तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना की तपोवन स्थित सुरंग में भी पानी के साथ मलबे का रिसाव हो रहा है।सुरक्षा की द़ष्टि से एनटीपीसी ने इस सुरंग में कार्य बंद कर श्रमिकों को फिलहाल वहां से हटा दिया है। एनटीपीसी के अधिकारियों का कहना है कि सुरंग निर्माण कार्य में यह एक सामान्य बात है। वहीं जिला प्रशासन ने इस संबंध में एनटीपीसी से रिपोर्ट मांगी है।चमोली जिले में धौली गंगा पर एनटीपीसी 2001 से तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना का निर्माण कर रही है। हालांकि इस परियोजना का निर्माण वर्ष 2021 में ऋषिगंगा जल प्रलय के दौरान भारी नुकसान होने के बाद बंद हो गया था। अब फिर से परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, लेकिन परियोजना निर्माण के साथ ही सुरंग में खतरे भी सामने आ रहे हैं।

एनटीपीसी के जन संपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह जयाड़ा ने बताया कि 15 अगस्त की सुबह सुरंग के अंदर कैविटी दिखाई दी। कैविटी को सामान्य भाषा में सुरंग के ऊपरी हिस्से में छेद होना कहते हैं। इस छेद से निरंतर पानी व मलबा आ रहा है। इन दिनों एनटीपीसी की तपोवन से हेलंग तक आने वाली मुख्य सुरंग की इस एडिट टनल में निर्माण कार्य चल रहा था।इस सुरंग में तीन दर्जन से अधिक श्रमिक व कर्मचारी कार्य करते हैं। भूस्खलन व पानी निकलने से एनटीपीसी ने श्रमिकों को बाहर निकालकर फिलहाल सुरंग में कार्य रोक दिया है। वहीं इस बड़े खतरे को एनटीपीसी द्वारा सामान्य घटना बताए जाने पर कर्मचारियों व स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

2021 की आपदा से जुड़ी है तपोवन सुरंग

तपोवन में परियोजना की वही जगह है, जहां सात फरवरी 2021 की भीषण जलप्रलय ने भारी तबाही मचाई थी। रौंठी ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी।ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया था, जबकि तपोवन एनटीपीसी परियोजना के बैराज और मुख्य सुरंग में कई किलोमीटर तक मलबा और पानी घुस गया था। इस आपदा में 206 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग लापता हो गए थे।

पहले भी सुरंग में आया था पानी

इससे पहले दिसंबर 2009 में भी इस परियोजना की टीबीएम साइट झडकुला वाली सुरंग में चट्टान गिरने से एक पानी का प्राकृतिक स्रोत फूट गया था, जिससे 600 लीटर प्रति सेकेंड पानी का रिसाव होने लगा। पानी का रिसाव आज भी जारी है। इससे परियोजना का कार्य वर्षों तक रुका रहा।इसके बाद वर्ष 2012 में भी परियोजना की सुरंग में पानी का रिसाव हुआ। इसके बाद एलएनटी कंपनी ने परियोजना का ठेका छोड़ दिया। अभी भी झडकुला साइट पर एनटीपीसी की टीबीएम मशीन अंदर फंसी हुई है।

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