मुजफ्फरनगर। जनपद के कृषि विज्ञान केंद्र चितौड़ा में “कर्मचारी-अधिकारी वैज्ञानिक संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कृषि विभाग के फील्ड कर्मचारियों को फसल कटिंग की प्रक्रिया तथा संतुलित उर्वरकों के प्रयोग के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य फील्ड स्तर पर कार्य कर रहे कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, किसानों तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाना तथा कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना रहा। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कर्मचारियों को बताया कि फसल कटिंग के माध्यम से खेतों में वास्तविक उत्पादन का सही आकलन किया जा सकता है, जिससे कृषि योजनाओं और नीतियों के प्रभाव का सटीक मूल्यांकन संभव होता है। इसके साथ ही कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि किस प्रकार फसल कटिंग के दौरान निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पारदर्शिता बनाए रखी जाए।
कार्यक्रम में संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने से फसलों की उत्पादकता बढ़ती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और किसानों की लागत भी कम होती है। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न फसलों में उर्वरकों की सही मात्रा, समय और विधि के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि वे किसानों को जागरूक करते हुए उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित करें ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने फील्ड कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कर्मचारी नियमित रूप से अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय रहें और किसानों से सीधा संवाद बनाए रखें। उन्होंने कहा कि खेतों में जाकर किसानों को नई कृषि तकनीकों, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना बेहद आवश्यक है, जिससे किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकें और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आए।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र चितौड़ा के अध्यक्ष डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. रीना, डॉ. सौम्या, सचिन कुमार, अमित पारस, राजीव लंबा सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों ने फील्ड कर्मचारियों से संवाद करते हुए उन्हें खेती से जुड़ी विभिन्न तकनीकों और चुनौतियों के बारे में भी जानकारी दी तथा किसानों के हित में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम को कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और किसानों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।















