समरसता सम्मेलन में जयंत ने दिया भाईचारे का संदेश.

मुजफ्फरनगर। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल ने सामाजिक समरसता और भाईचारे को लेकर अभियान की शुरुआत मुजफ्फरनगर से की। रविवार को पचेड़ा कला स्थित जनता इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सर्व समाज को साथ लेकर चलने और गांव-गांव संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।जयंत चौधरी ने कहा कि हर गांव में व्यक्तिगत रूप से पहुंचना संभव नहीं है, इसलिए सामाजिक समरसता का मंच तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि सभी समाजों को साथ बैठाकर आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पसंद अलग हो सकती है, लेकिन सामाजिक रिश्ते और भाईचारा राजनीति से ऊपर होने चाहिए।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव और हर घर तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनने की अपील की। जयंत ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक संबंध जातीय पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि विचारधारा, मानवता, बराबरी और सम्मान के आधार पर होने चाहिए। उन्होंने चौधरी अजीत सिंह की कर्मभूमि मुजफ्फरनगर में हुए भाईचारा सम्मेलनों को याद करते हुए कहा कि उनके विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

सम्मेलन में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए जयंत ने कहा कि भारत की विविधता उसकी ताकत है। अलग-अलग परंपराओं और संस्कृतियों के बावजूद समाज में समानता, गरिमा और एक-दूसरे के सम्मान की भावना बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘अपना-पराया’ की सोच छोड़कर साझेदारी का वातावरण बनाना होगा।

जयंत चौधरी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर तक सामाजिक समरसता अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने किसान, ग्रामीण नौजवान और रोजगार के मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल का उचित मूल्य, कम जमीन वाले किसानों और भूमिहीन ग्रामीणों के भविष्य तथा युवाओं के रोजगार जैसे सवालों पर गंभीरता से विचार जरूरी है।

उन्होंने गन्ना भुगतान, गन्ने के भाव और एथेनॉल नीति का जिक्र करते हुए कहा कि खेती से जुड़ी अर्थव्यवस्था का लाभ किसान के साथ मजदूर, कारोबारी, चीनी मिल, कोल्हू और खांडसारी इकाइयों तक पहुंचता है। उन्होंने विपक्षी राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज को जातीय आधार पर बांटने के बजाय किसान, रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।

जयंत ने 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह की जयंती पर नूरपुर में प्रस्तावित कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि रालोद का संदेश भेदभाव के बजाय संवाद, टकराव के बजाय समन्वय और दूरी के बजाय साझेदारी का है। संबोधन के दौरान उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता बाबा हरिराम के निधन पर शोक भी व्यक्त किया।

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